Friday, May 29, 2026

दंगा


झुंड में रहकर पत्थर तुम चलाते हो,

अकेले में तो बस मुँह छुपाकर भागते हो।

नहीं है हिम्मत तुममें से किसी में भी,

फिर भी न जाने क्यों बहकावे में आते हो।


ज़रा विचार करना तुम मेरी इन बातों पर,

क्या बाद तुम्हारे, घर को वो सँभालेंगे?

माना कि चंद सिक्कों से मदद कर भी दें,

पर क्या तुम्हारी कमी वो कभी भर पाएँगे?


दंगों की आग में तुम्हें तो वो झोंक देते हैं,

खुद चारदीवारी में चैन से आराम फरमाते हैं।

हाँ, वही हैं वो तथाकथित बड़े लोग,

जो गरीबों का खून बहाकर रसूख बढ़ाते हैं।


कब समझोगे तुम इन बेरहम जालिमों को,

जो सिर्फ फायदे के लिए तुम्हें इस्तेमाल करते हैं।

तुम्हारे जज्बातों से खेलकर गंदा दाँव,

आपस में तुम्हें लड़ाकर वो महान बनते हैं।


कहीं आगजनी है, तो कहीं भारी तोड़-फोड़,

तुम देश की ही संपत्ति को नष्ट करते हो।

क्या तुम्हें खबर नहीं कि नादानी में अपनी,

अपने ही टैक्स के पैसों का कत्ल करते हो?


तुम्हारा खून बहता है, तुम्हारे पैसे जलते हैं,

और मजे में महलों के वो चिराग जलते हैं।

गर तुम थोड़ा सा भी संयम रख लो,

तो घबरा जाएँगे वो जो तुम्हें भटकाते फिरते हैं।


तुम लड़ो मत, बस धैर्य से काम लो,

सोचो, समझो और फिर निष्कर्ष पर पहुँचो।

सिर्फ सुनी-सुनाई बातों के फेर में आकर,

कृपया अपना आपा और होश न खोओ।


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