Friday, January 10, 2025

हार गया


हां मैं हार गया,
दूसरों को समझाते समझाते,
खुद को नजरअंदाज करते करते
मैं थक गया औरों की जिंदगी जीते जीते।

करूं कुछ अपने मन का,
तो सब नाराज़ हो जाता है।
बात मानू सबका तो,
स्वयं का अस्तित्व नहीं दिखता है।

अपना बात रखूं तो,
कोई उसे अहमियत नहीं देता है।
किसी की एक ना सुनूं तो,
मुझे तुरंत बुरा बनाया जाता है।

कैसे और किससे करूं,
अपने दिल का हाल बयां।
जिसे समझना था मुझे,
वो भी पूरी तरह मेरा हो ना पाया।

अपनी बात अपनो को ही
समझा नहीं पाता हूं।
किसी ओर की क्या बात करूं
खुद से खुद को विश्वास नहीं दिला पाता हूं।

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Wednesday, November 6, 2024

छोड़ो ये नादानियां


कभी पूछो जरा उनसे,

जिन्हे तुम जबरदस्ती रंग लगाते हो।

उन्हें बेशक पसंद होगा होली,

पर तुम उनको त्योहारो से नफ़रत करवाते हो।

 

बुरा ना मानो होली है कह कर,

त्योहार का गलत फायदा उठाते हो।

जिन्हे पसंद भी ना हो रंग खेलना

उन्हें भी जहां मन वहा स्पर्श करते हो।

 

यार छोड़ो ये नादानियां,

लगाओ गुलाल पर ना चलाओ अपनी मनमानियां।

खेलो होली, ना करो किसी पर अत्याचार।

सब मिलकर मनाओ ये होली का त्योहार।

 

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पंक्तियां


कभी पूछो जरा लेखकों से,

उनके जीवन में ये कितना महत्व रखता है।

वो खाना घूमना सब भूल सकते है,

पर कविता लिखे बिना उन्हें सुकून नहीं मिलता है।

 

एक कवि का प्यास उनके कविता से मिटता है,

बिना लिखे उनका दिन अधूरा सा बीतता है।

ये एक बेहतरीन जरिया माना जाता है,

कई सामाजिक संदेश इस माध्यम से पहुंचाया जाता है।

 

कुछ पंक्तियों में ही सारी कहानी बयां होती है,

जो बता ना सके वो एहसास लिखी जाती है।

ये कविताओं की ही तो विशेषता है,

जो नहीं भी पढ़ता हो, उसके मन को भी भा जाती है।


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