Sunday, March 22, 2026

चांद रात



यूं जो तूने बरसाया है,

मेरे रोज़ों पर यह पानी।

ऐ अल्लाह! क्यों की तूने,

चांद रात को अपनी मनमानी?


'ऊपर वाला' कहते हैं तुझे,

तेरे लिए ही की इबादत।

तूने ही तो छीन ली हमसे,

ईद मनाने की वह आदत।


शिकायत है बस तुझसे ही,

नए लिबासों को खराब किया।

जो बैठे थे दुकानें खोलकर,

उन सबको भी तूने नाराज़ किया।


शिद्दत से हर रोज़ा रखा,

वक्त पर की मैंने इफ्तारी।

पर तूने हमारे जश्न के दिन,

कर दी घर में ही गिरफ़्तारी।


कोई बात नहीं ऐ मेरे मौला,

अगले साल फिर रखेंगे रोज़ा।

तुझे खुद से अब दूर होने का,

हम कभी न देंगे कोई मौका।


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